Floating two Straw!!!

Bare foot, I was wondering,
Walking in garden,
Saw her,
Walking her Dog,
With dew in her hair,
From the spider nets,
Within the shades of water droplets,
I got her glance.

I walked to her,
Called her by name,
The meet after 10 years,
Was just like a dream.
Carefully decided on time,
To meet.

The old love sparked,
We remembered those days,
Lucky for me she was still same,
We did hold our hands,
And planned to recreate
What we did at our last meet.
We walked out,

After a while I can feel her breaths,
It was the feel, what we imagined,
The breath of our did appear,
Our breath were warm,
And lips were flickering
The leading kiss was passionate,
The waves were slow,
We floated over it,
As if joined together were two straw.

दरवाजा

[ये कविता मैंने आपने एक मित्र के इच्छा के अनुसार,उसके एक नियत कार्य (Assignment) में सहयोग करने हेतु उसके द्वारा निर्धारित विषय और मापदंड पर लिखा था| मूल शब्द दरवाजा था और विषय वस्तु रोमांच और असमंजसता थी| अगले बीस मिनट में मैंने ये कविता लिखी| और अब में ये आप लोगों के बीच बाँटना चाहता हूँ| आशा है आप लोगों को ये पसंद आएगा| ]
My friend Asked me to write a poem with a word included Door which have the theme of romance and suspense. This was what I came up with in 20 Minutes.

उठ रही खुशबू, दे रही चहक,
एक महक, फैली चहुँ ओर,
दिख न सकी नज़रें फिराने के बाद,
कशिश छोर गयी, इसके उसके सबके  पास|

ढूँढा,ढूंढता रहा,
पेड़ों के पीछे, झाड़ियों में,
सोचा मिल जाएगी वो कुसुम,
जिसने ये राग छेड़ा, रंग छोड़ा!

फिर दिखा एक दरवाज़ा,
एक दरवाजा दूर, लेकिन था बंद पड़ा,
बढ़ा पग उस ओर मैं चल पड़ा,
कुछ मिल जाये, ये सोच रहा!!

पहुंचा वहाँ, बढ़ा हाथ अपने,
दरवाजा खोलने की सोच रहा,
तभी झिलमिलाई एक लाल सी रोशनी,
नीचे से उस दरवाजे के!!

एक सिरहन सी उठ गयी,
दरवाजे की पीछे छिपी,
उस खूबसूरत मूर्ति की,
तसवीर जिगर में उभर गयी!!

दरवाजा था बीच में पड़ा,
खोलने की चाह था मन में भरा,
लेकिन दरवाजा पड़ा बीच में,
रहा मुस्कुरा मुझ पर|

उठ रही खुसबू को पाने की चाहत,
मुझे दरवाजे के इस पर रोक रखी!