​दिलासा!!!

इंतेजार था मुझे, थी एक आशा बंधी,
जीता था हर दिन,
हर पल रहती थी ये चाहत,
मिलेगी वो राह चलते,
इस पग पर या उस पथ पर।
कैसे पहचानेगी उन आँखों को,
ये आँखें मेरी,
भय था कि पास आ कर भी,
हो न जाये फिर वो दूर कहीं,
करता था मैं दुआ हर वक़्त उस खुदा से,
रहना नहीं अकेले अब बस मेरे!
कह गया ग़ालिब गुजरते मेरे बगल से,
वक़्त सिर्फ लाता नहीं तोहफे बिना किसी खत के!!

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चूक गया मैं!!!

 

भय था न होऊंगा सफल,
सो कोशिश कभी की नहीं,
आज जो होना था मेरे पास,
पाने से पहले खो दिया मैंने,
चूक गया मैं!

सोचता रहा तब तक,
जब तक न सोच लिया कि
है नहीं संभव मेरे लिए उसको पाना,
आज जब वो है किसी और कि,
तो फिर क्यों रोना सोच के कि,
चूक गया मैं!

आज भी तस्वीरों को देखता हूँ,
रोकता हूँ अपने आपको,
कि न आये वो मेरे सोच में,
लेकिन क्या करूँ आज भी वो बसी
है विचारों में जिसे हूँ,
चूक गया मैं!

भय था न होऊंगा सफल,
सो कोशिश कभी की नहीं,
आज जो होना था मेरे पास,
पाने से पहले खो दिया मैंने,
चूक गया मैं!

तकलीफ ले बैठी हैं ये आँखें मेरी!!!

तकलीफ ले बैठी ये आँखें मेरी,
उड़े जो जुल्फ तेरे चेहरे से,
गया चुभ एक कांटा पैरों में मेरे,
टिकी जो नज़र तेरे चेहरे पे|

गया लड़खड़ा हवा के उस झोखे से,
हो गयी थी नशीली जो तेरे खुशबू से,
बदल गया था रंग उस गन्दी गली का,
खिल गए हों फूल जैसे चमेली के|

भूल गया मैं माँ का कहा,
सुने जब से झनकार तेरे पायल के,
तेरी आवाज सुन के खो गया मैं जैसे,
सुना दी हो किसी ने गाने मुझे लता के|

थम गया समय और जम गए हाथ मेरे
जब से हुआ स्पर्श तेरे हाथों के,
एकटक देख रहा खुद के हाथों को,
जैसे छप गया हो वहां तस्वीर तेरे|

खोया खोया सा रहने लगा मैं,
जब से आई तू रहने को पड़ोस में मेरे|

तकलीफ ले बैठी ये आँखें मेरी,
उड़े जो जुल्फ तेरे चेहरे से,
गया चुभ एक कांटा पैरों में मेरे,
टिकी जो नज़र तेरे चेहरे पे|

कसक है मेरे हर सिसक में!!!

कसक है मेरे हर सिसक में
हर लम्हे हैं भरे ख्यालों से,
ढक लेता हूँ हर बुझती लौ को,
मय बूंदों के साथ पी रहा हर दर्द को|

चाहत आज भी गयी नहीं,
मोहब्बत आज भी बाँकी है,
हर चेहरा दिखता है तेरे जैसा,
ख्यालों के शुरुआत पर|

टूटते हर ख्वाब में,
है एक चीज़ एक सी,
सब में है तू छिपी,
तेरी मूरत और तेरी सूरत हसीं|

कसक है मेरे हर सिसक में
हर लम्हे हैं भरे ख्यालों से,
ढक लेता हूँ हर बुझती लौ को,
मय बूंदों के साथ पी रहा हर दर्द को|

पागलपन !!!

है ये जिन्दगी मेरी, है ये पागलपन मेरा,
बह रही जज्बातें मेरी है ये पागलपन मेरा,
वो दूर है मुझसे, फिर भी पाने की चाहत है मुझे,
उसकी याद में आंसूं बहाने की चाहत है मुझे
खोया है दिल मेरा दीदार पाने को उसके,
ढूंढता है हर रोम मेरा छुअन के एहसास उसके,
जनता हूँ लेकिन ये चाहत है पागलपन मेरा|

जब वो मिली पहली बार, चाहना उसे था पागलपन मेरा,
पीछा करना, देखते रहना था पागलपन मेरा,
खोये रहता था उसकी बातों में,
सुनना उसका हर कहना था पागलपन मेरा,
आज भी एहसास बचे हैं, कसीस छिपी है जहेन में मेरे,
वो दीदार की बातें, वो लम्बी हसीं मुलाकातें
को  याद करते रहना है पागलपन मेरा|

ये पागलों सा जीवन बिताना है ये पागलपन मेरा,
यूं उसकी बातें सुनाना है पागलपन मेरा,
उसके नैन थे नीले, सुर्ख ओठों की छुअन,
उस एहसास को दुबारा पाने की चाहत है पागलपन मेरा,
दर्द में रोते रहकर, खुद को मिटा रहा,
लेकिन उसे भूलने की सोचना है पागलपन मेरा|

है ये जिन्दगी मेरी, है ये पागलपन मेरा|