I Am Sorry!

10849760_719038058192913_1804122520339605633_nI am sorry, I shouted at you,
I am sorry I got angry,
I am sorry that I was not there,
But it was not something,
I ever expected,
I didn’t know you will be lost,
I didn’t know I will never see you,
I was angry that you kept me waiting,
I was angry that you didn’t see me,
But I never knew that unhappy I will be last,
Which talked to you.

I am still angry,
You didn’t fill the promise,
You said you will come back,
You promised that I will be the one,
You will first meet.
And look at you! You are gone,
Leaving us all in shock,
And a promise which will make me regret,
My last anger for life.

You remember,
It wasn’t long when we got close,
We shared bench, we shared lunch,
Taking nap during break,
Cracking jokes and pulling pranks,
I have always missed that,
You remember,
4th bench of the first row,
For All the 4 years,
Yes you missed one,
And you bragged about that one,
That you had so much fun.

I hope it was not true,
I hope you were all fine,
I hope you still there to dance,
Like a maniac, like a drunkard,
I hope that we can still pull your legs,
Tell you off for the flirt you were,
I hope I was not angry,
On the last call,
I hope I had the chance to say,
But it is late, you are gone,
And all I can do is to say it again, I am sorry!

दोस्ती एक अजीब रिश्ता! [Friendship]

When all-around everyone is talking about friendship day,  I went in my thoughts, those every moment I spent with friends. How precious they are for me? And By- default 😛 they are one of the most amazing days. Every one of them are precious in my life and all of them make my life look beautiful. Just can’t express all what I feel right now! But Yo frens here is just a tiny Hint  how important you all are in my life! Thanks for being the part of my life!

दोस्ती एक अजीब रिश्ता,
एक एहसास किसी के साथ का,
फल एक अनजाने से मुलाकात का,
साथ साथ हसने का, खिलखिलाने का,
हर गम, दुःख बाटने का|

वो हर पल जो बिताये हमने,
यारों के बीच, अनजानों! जो बने अपने के बीच,
एक हसीं सपने सी बन गयी है जीवन में,
हर दोस्त जीवन माला में मोती बन,
बना गए अमूल्य हर एक वो पल|

आज अकेला हो कर भी अकेला लगता नहीं,
दोस्तों से बात करके जी भरता नहीं,
उनकी हसी मुस्कराहट भर जाती है,
गम उनका फ़ेंक देता है पत्थर जैसे सीने पे,
सोच से परे है वो ख्याल बिना दोस्तों के जीने के|

ए खुदा खुश हूँ तुने बनाया है ये रिश्ता,
हर रिश्ते से अलग मगर अमूल्य हर रिश्ते सा,
जिनसे हर बात बोल लेता हूँ बिना चोट पहुंचाए उन्हें,
जो समझ लेते हर बात बिना कोई बात बताये,
बन गए जो अपने बिना खून का रिश्ता बनाये|

दोस्ती एक अजीब रिश्ता,
एक एहसास किसी के साथ का,
फल एक अनजाने से मुलाकात का,
साथ साथ हसने का, खिलखिलाने का,
हर गम, दुःख बाटने का|

मोहब्बत हुई आपसे !!!

मोहब्बत हुई हमे आपसे, आपके मुस्कान से,
आपकी नज़र से, सुर्ख ओठ में छलकते जाम से,
कशिश  है आपकी, असर है आपके रंगत की,
जिन्दगी जीनी है आपके नाम की,
फ़िल्मी हूँ नहीं, कहता न की न जी पाउँगा तेरे बिन,
लेकिन सच तो ये भी याद करूँगा हर रात हर दिन|

असर हुआ है आपका जिन्दगी पे मेरे,
हर सांसों की, हर लम्हे के आप थे लूटेरे,
जीता हुआ था मैं समझता खुद को,
देखा तुझको, हार गया खुद को,
कहता नहीं की देखे बिना न गुजरती है रात दिन,
जान लो तुम होगा क्यों जब सपनो में हो हर पल हर दिन|

कोशिश मैं हूँ करता तुझको पाने की,
जानता हूँ इस कदर की न है जरूरत आजमाने की
तेरी इच्छा की कदर मैं करूंगा,
तेरी शादी हो जाने तक इंतज़ार मैं करूंगा,
कहता नहीं की सांसें रुक जाएँगी उसके बाद मेरे.
लेकिन मालूम है मुझे तब तक लूँगा साँसे नाम के तेरे|

अगर हो कभी एहसास मेरे प्यार की,
देना हो तवज्जो मेरे इकरार को, इंतज़ार को,
आ जाना या देना एक आवाज़ तुम, लेना सांस मेरे नाम की,
एहसास हो होगा तुम्हे मेरे पास होने का,
कहता हूँ मैं ये तेरे एक बुलावे पे आ जाऊँगा,
करता हुईं प्यार इस कदर तुमसे, दिल से निभाऊंगा|

मोहब्बत हुई आपसे, आपके व्यवहार से,
आपके हर अदा से, हुई मोहब्बत मुझे अपने जाने बहार से!

ना दिखती तू आज कल, कोई बात नहीं!!!

ना दिखती तू आज कल, कोई बात नहीं,
देखता हूँ तस्वीरों में, है ये बात सही,
ना दिखती तू आज कल, कोई बात नहीं,
रहती है तू पास मेरे, है ये बात सही|

तेरा मिलना आज कल दूभर हो गया,
ऐसा लगता है तेरा मुझसे जी भर गया,
कुछ ऐसा हुआ, तेरी तस्वीर उभर गयी,
तेरे याद के आसुओं से आँखे मेरी भर गयी|

कोई नहीं गर  ना मिल मुझसे, ना  दे दिखाई,
जान ले  ये तू, सह रहा मैं दर्द जुदाई,
यकीन ना करेगी तू, इसका है मुझे पता,
याद तेरी रह रह के रही है मुझे सता|

कवितायेँ कितनी लिख डाली,
कहानी कितनी कह डाली,
पता चला ना हो तुझे शायद
मैंने खुद को बदल डाली|

देख लेना तू ये एहसास तो होगा तुझे,
शायद तब दिख जाये ये लौ बुझे,
खाली पन्नो पे शब्द पड़े होंगे,
लेकिन उनमे छिपे एहसास मर गए होंगे|

पछताना तेरा शायद तुझे रुलाएगा,
शब्दों में छिपा हर जज़्बात नज़र आएगा,
उस दूर उड़ चुके पंछी को तू बुलाएगी,
जितना भी चाहे तू ना भूल उसे पायेगी|

अब भी समय है हाथ में तेरे,
रह मत चुप, ना रह मुह फेरे,
शब्दों में छिपे एहसास को पहचान,
आजा वापस, तू बात मेरी मान|

ना दिखती तू आज कल, कोई बात नहीं,
देखता हूँ तस्वीरों में, है ये बात सही,
ना दिखती तू आज कल, कोई बात नहीं,
रहती है तू पास मेरे, है ये बात सही|

दरवाजा

[ये कविता मैंने आपने एक मित्र के इच्छा के अनुसार,उसके एक नियत कार्य (Assignment) में सहयोग करने हेतु उसके द्वारा निर्धारित विषय और मापदंड पर लिखा था| मूल शब्द दरवाजा था और विषय वस्तु रोमांच और असमंजसता थी| अगले बीस मिनट में मैंने ये कविता लिखी| और अब में ये आप लोगों के बीच बाँटना चाहता हूँ| आशा है आप लोगों को ये पसंद आएगा| ]
My friend Asked me to write a poem with a word included Door which have the theme of romance and suspense. This was what I came up with in 20 Minutes.

उठ रही खुशबू, दे रही चहक,
एक महक, फैली चहुँ ओर,
दिख न सकी नज़रें फिराने के बाद,
कशिश छोर गयी, इसके उसके सबके  पास|

ढूँढा,ढूंढता रहा,
पेड़ों के पीछे, झाड़ियों में,
सोचा मिल जाएगी वो कुसुम,
जिसने ये राग छेड़ा, रंग छोड़ा!

फिर दिखा एक दरवाज़ा,
एक दरवाजा दूर, लेकिन था बंद पड़ा,
बढ़ा पग उस ओर मैं चल पड़ा,
कुछ मिल जाये, ये सोच रहा!!

पहुंचा वहाँ, बढ़ा हाथ अपने,
दरवाजा खोलने की सोच रहा,
तभी झिलमिलाई एक लाल सी रोशनी,
नीचे से उस दरवाजे के!!

एक सिरहन सी उठ गयी,
दरवाजे की पीछे छिपी,
उस खूबसूरत मूर्ति की,
तसवीर जिगर में उभर गयी!!

दरवाजा था बीच में पड़ा,
खोलने की चाह था मन में भरा,
लेकिन दरवाजा पड़ा बीच में,
रहा मुस्कुरा मुझ पर|

उठ रही खुसबू को पाने की चाहत,
मुझे दरवाजे के इस पर रोक रखी!

डर मत, न करूंगा तुझे परेशान!!!!

डर मत, न करूंगा तुझे परेशान!!!!

देख मुझे तुने, छिपा लिया खुद को,
क्या सोचा होगा न आभास मुझे,
या फिर सोचा की देख न पाऊंगा तुझे.
देख लिया था मैंने, जब तुने देखा भी न था,
छिपने का तुने उस समय सोचा भी ना था|

भांप ली तेरी तम्मना, खुद को छिपा लिया,
सामने होकर भी बना बेगाना,
मुख मोड़ मैं रहा बैठा, अपनी बातों मैं डूबा रहा,
कि न हो तुझको ये एहसास
कि है मुझे एहसास तेरी मोजुदगी का |

वक़्त बदला मैंने बदल ली आपनी सोच,
समझ गया मैं है बहुत दूरियां दोनों कि बीच,
लेकिन अजनबी बनने की जरूरत नहीं,
सोच मैं बनाये रखा रिश्ता दोस्ती का,
करता रहा तुझसे बातें खुद से खुद को छिपा|

लकिन वाह तेरे भी क्या कहने,
बिन मेरे कहे तुने सब कुछ समझ लिया,
मेरे तालाब को दरिया तुने समझ लिया,
अगर मैं दरिया रूप मैं बना रहता,
तो रुक न पाती मुझमे उठती सैलाब,
न था ऐसा कुछ तभी तो सूख गयी जैसे तालाब|

चल इसमें भी तेरा सहयोग कर दूं,
खुद को तुझसे दूर रख लूं,
कोशिश करूंगा न हो सामना अपना,
न पड़े तुझको कभी शर्मिंदगी झेलना,
रह खुश तू, शायद मैं भी खुश हो सकूँ,
तुझको भुला खुद में खुद को खो सकूँ|

तुम वो और ये!!!

आज हुआ कुछ अजीब सा,

एक दास्ताँ जो छेड़ गयी मुझे,
आज सपने में दिखी
तुम वो और ये!

भोचक्का था मैं,
देख तीनो को साथ में खड़े,
तुमसे नज़रें ना हटती थी
उससे नज़रे छुपती थी,
इसकी बात ना पूछो
ये तो हर जगह दिखती थी!

वो आई, हो गयी साथ में खड़े,
मैं नज़रें नीचे किये,
था रहा घूर अपने जूते पड़े
वो मुस्कुरा रही थी,
दे गयी गलियां खड़े खड़े!!!

मैंने हाथ उठाया, कह दिया बाय,
निकल ना सकी दिल से हाय!
तू ताड़ गयी, ना आई पास मेरे
तेरी आँखे कह गयी सब कुछ,
बिन तेरे कुछ कहे!

इसकी बात ही क्या कहूं,
इसे कुछ फर्क ना पड़ा,
ना उसके कुछ कहा, न दुत्कारा
आ पास मैं खड़े उसने मुझे पुकारा,
वो प्यार के मारे, रह इस दोस्त के सहारे!

आज हुआ कुछ अजीब सा,

एक दास्ताँ जो छेड़ गयी मुझे,
आज सपने में दिखी
तुम वो और ये!

My Last Poem of the Year!!!!

रात की कहानी!!!

एक रात की कहानी,
कहाँ से शुरू कहाँ पर खत्म,
वो कहानी खामोशिओं में दफ़न,
एक रात की कहानी,
ना हुई शुरु ना हुई खत्म!!

एक हसीं पल, एक दीवानगी
सोच से परे, जाने कब
हुई शुरू,  जाने कब हुई खत्म,
छिपते छिपाते, हुई ये शुरु,
देखते दिखाते हुई खत्म

अँधेरी रात में, उजाला बन,
आई ये कहानी एक सवेरा बन,
रौशनी आने से पहले हुई खत्म,
रात की खामोशियों में,
दिखने से  पहले हुई दफ़न!!

टूटता तारा  बन रह जाएगी,
ऐसा सोचा ना था,
दिखने से पहले गम हो जाएगी,
ऐसा चाहा ना था,
एक कहानी जो शुरु होने से पहले
हो गयी खत्म!!!

एक  रात  की  कहानी,
शुरू होते  होते, हो  गयी  खत्म!!!

ढूंढता रहा मैं!!!

ढूंढता रहा मैं, उन गलियों मैं,

लगा  कर्ण अपने उन जर्जर दीवारों पे,

सुनसान राहों पे, गिरे पड़े दरारों पे,

चल पड़ा मैं खोज में उनके,

दर किनारों पे!

उन्हें  क्या  खबर  थी, कहाँ  पड़ा मैं,

उन  राहों  पे  डोरे  बिछाये,

उन्हें  तो  मालूम  भी  ना  था  की ,

राह  देख रहा  कोई , पलके  बिछाए   हुए!

ढूंढता  रहा  मैं  जंगल   किनारों  पे!

वो  कहीं  मस्त  हवाओं  से  खेल  रही  होगी ,

उन्हें  ना  खबर  कोई  अकेलापन  झेल  रहा  होगा ,

वो  समुन्दर  मैं  इठला  रही  थी ,

मैं  यहाँ  बैठा  तारें  गिन  रहा  था !

ढूंढता  रहा  मैं  अपने  मन – बीहर मैं!

लगी  उन्हें  भनक , समझ  ना  सकी  वो

सोची  विरह  मैं  बैठा  कोई  गुनगुना  रहा  होगा ,

वो  बेखबर  तुम्हे  क्या  खबर ,

ये  बंदा तेरे  इंतज़ार  मैं  खुद  को  डूबा  रहा !!

ढूंढता  रहा  मैं  खुद  को  इस  ज़माने  मैं ,

कभी  उनकी  नज़रों  मैं ,

कभी  खुद  के  फ़साने  मैं !!!

$ Just For You $

I want to say, to say you,
What I feel about you!!!
I want to talk, to talk to you,
But when I pick the phone,
Am scared to call you!!!

Scared of what I don’t know,
May be I am scared that,
I may hear a no
Or lose you even from
The talk we do!!

I want you to know,
To know what I feel For you ,
From the day I saw,
But don’t know how
To let you know.

When I see you,
Always think to say you,
But the dumb I am,
My thoughts never come
To the tongue!!

How will you know?
What is their inside me,
Neither do I know what
You think of me,
Still with hope I feel
You think the same as I do.

I will say, say you soon,
That you are my life’s first moon,
Again the question stay’s
How? Don’t know how?
I want to say, to say you,
What I feel about you!!!